भोपाल में 100 दिनों में 190 से ज्यादा लोग हुए जालसाजों का शिकार
लालच सबसे बड़ा खतरा, सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय, वारदात पर तुरंत करें राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत

भोपाल। सायबर जालसाजों से बचने के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रदेशव्यापी अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्कूल कॉलेज और गली मोहल्लों में भी जनसंवाद कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद सायबर जालसाजी की घटनाएं थमने के बजाए लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते 100 दिनों के भीतर भोपाल शहर में सायबर जालसाजी की 190 से ज्यादा घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें लोगों के करोड़ों रुपये ठग लिए गए।अधिकांश वारदातों में जालसाजों द्वारा ज्यादा लाभ कमाने का लालच दिया गया था। पुलिस अफसरों का कहना है कि सायबर ठगी से बचने का एकमात्र उपाय जागरूकता और सतर्कता ही है। इस प्रकार की घटना होने पर तुरंत ही पास के पुलिस थाने अथवा राष्ट्रीय सायबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। समय पर की गई शिकायत पर लोगों की रकम को बचाया जा सकता है।राजधानी में बीते चौबीस घंटों के भीतर ही सायबर जालसाजी की आधा दर्जन से ज्यादा घटनाएं सामने आई हैं। स्टेशन बजरिया इलाके में रहने वाले अनस्ता प्रसाद के पास एक पार्सल आया था, जिसे लेने के लिए उन्होंने 399 रुपए का भुगतान कर दिया। बाद में पता चला कि पार्सल पर उनका नाम नहीं है। उन्होंने पार्सल को वापस करने के लिए गूगल पर नंबर सर्च किया तो सायबर जालसाज से संपर्क हो गया। जालसाज द्वारा बताई गई प्रक्रिया सम्पन्न करने पर अनस्ता प्रसाद के खाते से करीब 82 हजार रुपये निकल गए।
परिचित बनकर बुजुर्ग से ठगे 42 हजार रुपए
इधर बागसेवनिया में रहने वाले बुजुर्ग सुरेंद्र भारद्वाज के पास उनके एक परिचित के नाम से मैसेज आया था। मैसेज में 42 हजार रुपए यह कहकर मांगे गए थे कि उनका यूपीआई काम नहीं कर रहा है। सुरेंद्र ने दोस्त को फोन लगाया तो फोन नहीं लगा और मैसेज मिला कि मीटिंग में हूं। उन्होंने दोस्त पर विश्वास करते हुए भेजी गई आईडी पर रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुछ देर बाद कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ने उनके मित्र के मोबाइल का स्क्रीन शॉट डालकर बताया कि यह मोबाइल जालसाजों ने हैक कर लिया है। स्क्रीन शॉट देखने के बाद सुरेंद्र को पता चला कि उनके साथ ठगी हो गई है।
पिता का नाम लेकर बेटी के साथ ठगी
शहडोल निवासी सुप्रिया घोष यहां बागसेवनिया में रहती हैं और पढ़ाई करती हैं। पिछले दिनों अनजान व्यक्ति ने उन्हें फोन लगाकर बताया कि उनके पिता ने लोन अप्लाई किया था जो पास हो गया है। वह लोन की रकम उनके मोबाइल पर भेज रहा है। उसके बाद उसने 30 हजार रुपये भेजने का मैसेज भेजा। कुछ देर बाद जालसाज ने बताया कि गलती से तीन हजार के स्थान पर तीस हजार रुपये ट्रांसफर हो गए हैं, इसलिए बाकी के 27 हजार रुपये वापस कर दो।सुप्रिया ने बगैर अपना एकाउंट चैक किए ही उसे सत्ताईस हजार रुपये लौटा दिए। जालसाज ने जब और रुपये मांगे तो उन्हें पता चला कि ठगी हो गई है।
विशेष अभियान में किया गया जागरूक
पुलिस द्वारा सायबर अपराधियों से बचने के लिए पिछले दिनों प्रदेशभर में सेफ क्लिक अभियान चलाया गया। इस दौरान विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थानों, बाजारों एवं सामुदायिक आयोजनों में व्यापक जनसंपर्क स्थापित कर सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का संदेश दिया गया। इसमें डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, फर्जी निवेश, यूपीआई एवं क्यूआर कोड फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग सहित विभिन्न सायबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए गए।
लालच बनता है सबसे बड़ा खतरा
अब तक जितने भी सायबर अपराध सामने आए हैं, उनमें अधिकतर लोग लालच में आकर फंसे हैं। पुलिस का कहना है कि ऑन लाइन जॉब, लॉटरी, निवेश अथवा क्रेडिट कार्ड की लिमिट आदि बढ़ाने के नाम पर लोगों को आसानी से शिकार बनाया जा रहा है। इस प्रकार के लालच में आने के बजाए सतर्कता बरती जाए तो सायबर अपराधियों से बचा जा सकता है।



